प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स का ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ सम्मान
ममता बनर्जी ने वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता बदलते ही तृणमूल समर्थकों पर बेलगाम हिंसा का दौर शुरू हो गया है
कोलकाता। बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद अब तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ आर-पार की जंग का एलान कर दिया है। शनिवार को कालीघाट स्थित अपने आवास पर आयोजित रवींद्र जयंती कार्यक्रम के दौरान ममता बनर्जी ने एक बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए वामपंथी, अति-वामपंथी और तमाम राष्ट्रीय दलों को भाजपा विरोधी एक साझा मंच पर आने का खुला न्योता दिया। रबींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर के समक्ष खड़े होकर उन्होंने बेहद गंभीर लहजे में कहा कि वर्तमान दौर में लोकतंत्र को बचाने के लिए मतभेदों को किनारे रखना होगा, क्योंकि दुश्मन का दुश्मन ही अब हमारा सबसे बड़ा मित्र है।
चुनाव परिणामों पर पहली बार इस तरह हमलावर होते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि यह लड़ाई असल में तृणमूल ने जीती थी, लेकिन षड्यंत्र के तहत उन्हें हराया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में इस चुनाव का सच जनता के सामने जरूर आएगा। गौरतलब है कि इस बार भाजपा ने 207 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की है, जबकि तृणमूल 80 सीटों पर सिमट गई है। वोट प्रतिशत का हवाला देते हुए ममता ने संकेत दिया कि 40.80 प्रतिशत जनादेश उनके साथ है, जो एक बड़ी चुनौती पेश करने के लिए पर्याप्त है।
ममता बनर्जी ने वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता बदलते ही तृणमूल समर्थकों पर बेलगाम हिंसा का दौर शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि आज राज्य में आतंक का माहौल है। मेरे और अभिषेक बनर्जी के घर के बाहर लगातार हंगामा किया जा रहा है, बच्चों तक को नहीं बख्शा जा रहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके कार्यक्रम को रोकने के लिए बाधाएं खड़ी की गईं, सजावट करने वालों को धमकाया गया और उन्हें खुद चौकियां खरीदकर और साउंड सिस्टम का इंतजाम कर कार्यक्रम करना पड़ा। ममता ने आरोप लगाया कि उनकी सुरक्षा हटा ली गई है और कुछ समय के लिए उनका इंटरनेट तक बंद कर दिया गया था।
अपनी अपील को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाते हुए ममता ने खुलासा किया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खडग़े समेत उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, हेमंत सोरेन और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं ने उनसे बात कर अपना समर्थन जताया है। उन्होंने कहा कि जो भी दल भाजपा के खिलाफ इस लड़ाई में साथ आना चाहता है, वह उनसे सीधे संपर्क कर सकता है। वहीं, ममता की इस अपील पर माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने तंज कसते हुए रवींद्रनाथ टैगोर की पंक्तियां-'जीवन जब सूख जाए, करुणाधारा बनकर आओ' उद्धृत कर राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है।
हिंसा से प्रभावित अपने कार्यकर्ताओं के लिए ममता ने एक राहत कोष बनाने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीडि़तों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ उनके कानूनी मामलों की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता और वकील कल्याण बनर्जी संभालेंगे। उन्होंने अपनी कार्यशैली की तुलना करते हुए कहा कि 2011 में जब उन्होंने बुद्धदेव भट्टाचार्य से सत्ता ली थी, तब उन्होंने उन्हें बुलेटप्रूफ गाड़ी और जेड प्लस सुरक्षा दी थी, लेकिन आज की सरकार बदले की भावना से काम कर रही है।